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पर्यावरण संरक्षण को लेकर इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने लिया जागरूकता का संकल्प
From Indirapuram Public School
पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को पर्यावरण से जुड़े विषयों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्कूल में विद्यार्थियों को स्वच्छता, पौधरोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के कम इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाती है।
विद्यालय का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की आदत बचपन से विकसित की जानी चाहिए। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को पर्यावरण के महत्व और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारे में समझाया जाता है।
स्कूल में आयोजित विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित पोस्टर, स्लोगन और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। बच्चों ने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की अपील की।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया जा सकता है।
विद्यार्थियों को पानी की बर्बादी रोकने, बिजली का अनावश्यक इस्तेमाल कम करने और कचरे को उचित स्थान पर डालने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें गीले और सूखे कचरे के बीच अंतर तथा कचरा प्रबंधन के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
विद्यालय में पौधों और हरियाली के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए भी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। बच्चों को पौधों की देखभाल और उनके महत्व के बारे में बताया जाता है।
पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिलती है। बच्चे न केवल स्कूल में बल्कि अपने घर और आसपास भी स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित होते हैं।
अभिभावकों का भी मानना है कि स्कूल स्तर पर पर्यावरण शिक्षा बच्चों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बचपन में विकसित हुई अच्छी आदतें आगे चलकर जिम्मेदार नागरिक बनाने में मदद करती हैं।
इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल द्वारा पर्यावरण संरक्षण को शिक्षा और गतिविधियों से जोड़ना विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि प्रकृति की सुरक्षा केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी जरूरी है।